पृथ्वी पर सबसे पुराना वंश सूर्यवंश है , भगवान श्री राम का जन्म भी इसी वंश में हुआ है , मारवाड़, मेवाड़, जयपुर जैसे बड़े बड़े राजघराने सूर्यवंशीय है एवम राम के ही वंशज है इन्ही राजघरानो से निकले कई ठिकाने, एवम जागीरी है जो पूरे भारत मे बसे हुए हुए|

—-सूर्य वंश की शाखायें:—-

1.राठौड,

2.कछवाह,

3.बडगूजर,

4.सिकरवार,

5.गुहिलोत(सिसोदिया),

6.गौर,

7.गहरवार,

8.रेकबार,

9.जुनने,

10.बैस,

11.रघुवंशी,

12.प्रतिहार(परिहार)

 

 वेदों कै अनुसार सृष्टि तीन आदिकालीन देवताओं (तत्कालीन राजाओं) से प्रारम्भ हुईं । इनमें से ब्रह्माजी क्रो सृष्टि का रचियता, विष्णुजी क्रो सृष्टि का पालनकर्ता व महेश (शिव ) को सृष्टि का संहारकर्ता माना गया है  हरिवंश पुराण कै अनुसार पृथ्वी पर तेरह बार सृष्टि की उत्पत्ति, विकास व अन्त में प्रलय द्वारा विनाश हुए व वर्तमान सृष्टि चौदहवीं पीढी की है । सृष्टि की प्रत्येक पीढी अयोनिज़ (जो स्त्री-पुरुष सहवास से उत्पन्न न हुआ हो) ब्रह्मा व उनकें पुत्र मनु से प्रारम्भ हुईं । इन चौदह मनु के नाम ये हैँ :

  • ♦(1) स्वब्वयंभुव मनु
  • ♦(2) स्वारोचिष मनु
  • ♦(3) उत्तम मनु
  • ♦(4) तामस मनु
  • ♦(5) रेवत मनु
  • ♦(6) चाक्षुष मनु (ये छहों मनु बीत गए हैँ)
  • ♦(7) वैवस्वत मनु (रामायण काल कै रामचन्द्रजी कै पूर्वज)
  • ♦(8) सावर्णि मनु
  • ♦(9) भौंत्य मनु
  • ♦(10) रौच्य मनु
  • ♦(11 ) ब्रह्म प्तावर्णिमनु
  • ♦(12) रूद्र सावर्णि मनु
  • ♦(13) मेरू सावर्णि मनु 
  • ♦(14) दक्ष सावर्णि मनु
 इनमें से तेरहवें मेरू सावर्णि मनु व चौदहवें दक्ष सावर्णि मनु भविष्य में होंगे तथा आठवें से बारहवें मनु तपस्वी एबं सिद्ध पुरुष होने से मेरू सावर्णि मनु कहलाये । इन सभी में से हमारे सूर्यवंश के जनक “वैवस्वत मनु ‘ ‘ हैं जो भगवान श्रीराम कै पूर्वज थे । इन्हें “विवस्वान ” अर्थात् “सूर्य ” भी कहते हैं । जिनर्क नाम पर रामचन्द्रजी का वंश “सूर्यवंश” कहलाया। बाल्मीकि रामायण में विवस्वान क्रो वैवस्वत मनु का पिता कहा गया है जबकि अन्य पुराण वैवस्वत मनु क्रो ही विवस्वान बताते हैँ । रामचन्द्रजी कै पूर्वज राजा इश्वाकू जिनकै नाम पर उनका वंश “इश्वाकु वंश” कहलाया, इन्हीं वैवस्वत मनु कै पुत्र थे । राजा दशरथ कै पितामह रघु जिनके नाम पर उनका वंश “रघुवंश ” कहलाया, वैवस्वत मनु से 59वी पीढी कै, राजा दशरथ 61वी पीढ़ी कै व श्रीराम 62वी पीढी कै राजा थे ।
पुराणों मॅ मुख्य राजा कै उत्तराधिकारियों क्री बंशक्रमानुसार जानकारी दो गई _
 
श्रीराम कै बाद-राम आदि सभी भाइयों व उनकी सन्तानों कें राज्य :-
1. भरत ने राम की आज्ञा से सिन्धु नदी कै दोनों तटों पर बसे गंधर्वो कै देश (गांधार या वर्तमान कंधारअफगानिस्तान ) पर आक्रमण कर उसे जीतकर उसके दो भाग करके आधे प्रदेश को “तक्षशिला” नाम देकर, अपने पुत्र ‘ ‘ त्तक्ष ” ‘ को उसका राजा बनाया तथा शेष आधे प्रदेश क्रो ‘ ‘ पुष्कलाबत नगर ‘ ‘ (वर्तमान पेशाबर पाकिस्तान ) नाम देकर अपने पुत्र ‘ ‘ पुष्कल ‘ ‘ क्रो वहाँ का राजा बनाया ।
2. श्रीराम ने ‘ ‘ कारूपथ देश” (वर्तमान मुंगेर व भागलपुर जिले-बिहार राज्य) क्रो अपने अधिकार में करके वहॉ ” ‘ अंगदीया ‘ ‘ ( अंगदेश) नामक राजधानी बनाकर लक्ष्मण . के पुत्र ‘ ‘ अंगद ‘ ‘ को वहाँ का राजा बनाया तथा “मल्लदेश” (देवरिया तथा कुशीनगर-बिहार) में ” “चन्द्रकान्ता ‘ ‘ नाम से विख्यात नगर बसाकर लक्ष्मण कै पुत्र ‘ ” चन्द्रकैतु ‘ ‘ को वहाँ का राजा बनाया ।
3. श्रीराम ने ‘ ‘ उत्तर-कोसल ‘ ‘ (राजधानी श्रावस्ती-उत्तरप्रदेश) का राजा ” ‘ लव ‘ ‘ को तथा ‘ ‘ दक्षिण-कोसल ‘ ‘ (राजधानी साकेत अथवा अयोध्या-जिला फैजाबाद, उत्तरप्रदेश) का राजा ‘ ‘ कुश ‘ ‘ को बनाया ।
4. राम की आज्ञा से शत्रुघ्न ने यमुना. किनारे बसी ‘ “मधुपुरी” (या मधुरा-वर्तमान जिला मथुरा, उत्तरप्रदेश) कै राजा लवणासुर नामक राक्षस का वध कर मधुरा को अपनी राजधानी बनाकर ‘ ” शूरसेन ” ‘ महाजनपद बसाया ।
5. शत्रुघ्न पुत्र “सुबाहु” ने उनके पश्चात मधुरा (मथुरा) का राज्य पाया तथा दूसरे पुत्र ‘ ‘ शत्रुघाती ‘ ‘ ने “विदिशा” (मध्यप्रदेश में स्थित) का राज्य पाया ।

सूर्यवंश के सम्बन्ध में कुछ रोचक तथ्य

1.आनर्त देश -मनु कै पुत्र प्रांशु उनकें पुत्र राग्याति और उनकै पुत्र आनर्त ने ‘ आनर्त देश ‘ (वर्तमान द्वारिका) राजधानी कुयास्थल्जी बसाया, जिसका आनर्त कै बाद उसका पुत्र रेव राजा वना ।
2.उत्कल (वर्तमान उडीसा ) वैवस्वत मनु कै पुत्र सुद्युग्न कै पुत्र उत्कल ने ‘ उत्कल राज्य ‘ बसाया। उत्कल कं चाद अम्यरीप आदि इसवी राजा वने ।
3.दण्डकारण्य वन उत्कल कै एक अन्य पुत्र ” दण्ड ‘ सन्यासी ही राये अत: उम्हें विरासत में जो वनक्षेत्र दिया गया (वर्तमान छत्तीसगढ राज्य
का बस्तर जिला और उसवनै आसपास का क्षेत्र) उसे उन्होंने ‘ दण्डकारण्य ‘ नाम दिया ।
4.गया (बिहार का जिला) … सुद्युग्न कै पुत्र ” राय ‘ ने ‘ रायादेश ‘ की स्थापना की ।
5.अयोध्या वैवस्वत मनु कै पुत्र महाराज इश्वाकुं ने अयोध्या का राज्य सर्वप्रथम स्थापित किया था जिसकै बाद उनकै उत्तराधिकारी विकूक्षी आदि अयोध्या वो राजा हुए ।
6.म्रतिष्ठानपुर (वर्त्तमान उत्तरप्रदेश कै इलाहाबाद जिले का झूसी नामक कस्बा) यह वैवस्वत मनु की पुत्री ‘ इला ‘ को (जो बाद में सुद्युम्न नामक पुत्र वन गई ) विरासत में मिला था । सुद्युग्न कै वाइ उसका एवदृ पुत्र पुरूरवा यहॉ का शासक हूआ ।
7.श्रावस्ती राजा इश्वाकुं कै एक वंशज युवनाश्व कै पुत्र ‘ ” आव ‘ ‘ या रा ५ ८ ८ ५ श्राबस्तक ने अपने नाम से श्राबस्तीपुरी बसाई थी ।
8.धुंधाड्र (वर्तमान राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर) आवस्तक का पुत्र बृहदश्व हुआ, उसका पुत्र कुवलयाश्व हूआ, जिसने उबत्त प्रदेश में रहने वाले ‘ धुंधु ‘ नामक दैत्य को मारकर ‘ ‘ धुंधुमार ‘ ‘ की उपाधि प्राप्त क्री और उस क्षेत्र का स्वामी बना । धुंध्रुमार का अपग्रंश ‘ धुंधाड़ ‘ हुआ जो आज जयपुर का एक छोटा सा कस्बा है ।
9.रोहितपुर (वर्तमान बिहार राज्य का जिला रोहतासगढ़) सुविख्यात सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र कं पुत्र रोहित ने इसे बसाया था ।
10.चम्मापुरी (प्राचीन अंगदेश क्री राजधानी और बर्तमान मुंगेर जिले काएक छोटा सा गॉव) रोहिताश्व के पुत्र हरित कै पुत्र चंचु उर्फ चम्प ने ‘ चम्पापुरी ‘ बसाई जो बाद में अंगदेश क्री राजधानी वनी ।
11.वैशाखी ५ मनु वी वंशज त्रणन्विन्दु नामक राजा ‘कै ‘ विशाल ‘ नामक पुत्र ने ‘ ‘ वैशाखी ‘ ‘ नगर की स्थापना की । विशाल कै बाद उनकं वंशज हेमचंद्र, धूम्राक्ष आदि दसवी राजा हुए ।
12.मिथिलापुरी (नेपाल का जनकपुर क्षेत्र तथा बिहार का सीतामढी, जयनगर, मधुबनी, दरभंगा आदि क्षेत्र ) श्रीराम की पत्नी सीता के एक पूर्वज ‘ ” भाधवबिदेध ‘ ” राजस्थान से चलकर उक्त क्षेत्र में पहुंचे थे । उनका एक अन्य नाम ‘ ‘ राजा मिथि ’ ‘ भी था । उन्होंने अपने नाम से‘ ‘ मिथिलापुरी ‘ ‘ राण्य बनाया ।
13.ओंकार मान्धाता (मध्यप्रदेश कं खण्डवा जिले कै अन्तर्गत एक स्थान वर्तमान ओंकारेश्वर ) ८रकूमचन्द्रजी बो पूर्वज राजा मान्धाता ने नर्मदा किनारे स्थित इस स्थान पर भगवान शिव को तपस्या की थी, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘ओंकार मान्धाता’ हुआ । आजकल इसे” ओंकारेश्वर’ कहते हैं ।