जोधपुर रियासत का भी बहुत बड़ा योगदान हैं बनारस हिन्दु विश्वविधालय के निर्माण एवं उसमें तकनीकि ,पशु चिकित्सा व कृषि विज्ञान के विकास के क्षेत्र में ।
जोधपुर के महाराजा सुमेरसिंहजी साहिब ने फ़रवरी 1913 ई मे जब पण्डित मदन मोहन मालवीय जी दरभंगा के महाराजा के साथ जोधपुर पधारे थे तब महाराजा श्री सुमेरसिंहजी साहिब ने दो लाख रुपये विश्वविधालय के लियें तथा 24 हज़ार प्रतिवर्ष शिल्पकला – विज्ञान की शिक्षा के लियें एक शिक्षक(Jodhpur Hardinge Chair of Technology) के लियें प्रदान करने का वचन दिया जिसे आगे भी निभाया गया ।
आगे चलकर महाराजा उमैदसिंहजी साहिब मारवाड़ नरेश ने 1927 ई. के नवम्बर में बनारस हिन्दु विश्वविघालय को दो लाख रुपये मारवाड़ी युवकों के लिये पशु – चिकित्सा ( veterinary ) और कृषि विज्ञान (Agricultural Science) की 4 इरविन छात्रवृत्तियाँ (Scholarship) नियत करने को कहा ।उसी समय महाराजा साहिब ने कृषि विधा की शिक्षा के लियें तीन लाख रूपये प्रदान किये जो इरविन- कृषि विधा – शिक्षक(Irwin Chair of Agriculture ) के नाम से दिये गये थे।
महाराजा साहिब के प्रयासो से जोधपुर राजपरिवार व प्रजा ने भी आपना योगदान दिया जो एक लाख रुपये था ।
मारवाड़ के महकमाख़ास रेकोर्ड में पण्डित मदन मोहन मालवीय जी एवं महाराजा उमैदसिंह जी साहिब के मध्य हुए पत्र व्यवहार से जाना जा सकता हैं ।
जोधपुर राजपरिवार सदैव शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणीय रहा हैं । आज भी वर्तमान राजपरिवार इन परम्पराओं का निर्वहन कर रहा हैं ।
पण्डित मदन मोहन मालवीय जी ने महाराजा उमैदसिंहजी साहिब को पाँच पत्र लिखे थे जिनमे मारवाड़ रियासत के आर्थिक सहयोग के लियें आभार जताया था ।
महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के संग्रह के कूछ महतवपूर्ण दस्तावेज़ों अवलोकनार्थ प्रस्तुत हैं ।










