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पद्मावत फिल्म को रोकने के लिए जब हुई जौहर की घोषणा 24 जनवरी 2018 का वो दिन..

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January 24, 2022

क्या हुआ था जौहर वाले दिन ? कैसे रुका जौहर ?

बॉलीवुड की एक फिल्म पदमावत जिसके बनने और रिलीज होने तक जो विरोध और विवाद हुआ वो आज भी कोई नही भुला होगा। दरअसल ये फिल्म शुरुवात से ही विवाद में घिर गयी और ऐसा क्यूँ न हो क्यूँकी बॉलीवुड में अक्सर विवाद उत्पन्न कर फिल्म को हिट करवा दिया जाता हैं। संजय लीला भंसाली जिनकी पिछली कुछ फिल्मे विवादों में आती है और हिट होती हैं, यही सब फिल्म पद्मावत के साथ भी किया गया। पर इस बार यह दाँव भंसाली पर उल्टा पड़ गया। दरअसल इस फिल्म का नाम पहले पद्मावती रखा गया और जब जयपुर में भंसाली के साथ जो हुआ उसके बाद वो फिल्म टाइटल को बदलकर पेश करने लगा और इसी बीच चित्तौड़गढ़ से जो खबर आई उसने सबके होंश उड़ा दिए । चित्तौड़गढ़ में जौहर करने की घोषणा होगयी।

जी हाँ आपने सही सुना जौहर। क्षत्राणियों ने फिल्म न रोकने पर जौहर करने का फैसला करलिया था। 21 जनवरी 2018 को चित्तौड़गढ़ में स्वाभिमान रैली निकली जिसमे सर्व समाज ने भाग लिया और फिल्म बंद करने की अपील की। लेकिन इसके बाद भी कुछ नही हुआ और जौहर करने का फैसला हुआ और जब दिनांक 24 जनवरी 2018 को जो हुआ उसकी जानकारी बहुत कम लोगो तक पहुँची। जब हमने इस ऐतेहासिक दिन की जानकारी लेनी चाही तो कुछ लोगो से हमारी भेंट हुई और हमे जो जानकारी मिली वो आपके सामने प्रस्तुत करते हैं। जो इस जौहर में उपस्थित भी हुए थे और उनका कहना था कि-

“उस दिन चित्तौड़ पूरी तरह बंद था और दुर्ग द्वार पर भारी पुलिस बल तैनात था चूँकि जौहर होगा तो दुर्ग में ही। दिन में सभी महिलाएँ और पुरुष जौहर भवन पर पहुँचने लगे थे और वही पर इकठ्ठा होगये। उस समय क्षत्राणियों का जो गुस्सा था वो इस कदर था की वो सच में दुर्गा का साक्षात रूप दिखाई दे रही थी और उनके अंदर अलग ही अग्नि थी। जो जन वहाँ जारहे थे उन्ही के साथ पुलिस बल भी साथ साथ था और जैसे ही जौहर भवन में सभी इकठ्ठे होने लगे तब सारे मीडिया वाले उनकी तरफ भागने लगे। क्षत्राणियों ने वहाँ सती मन्दिर में पूजा की और उसके बाद उनकी एक ही रट थी कि वो कैसे भी दुर्ग पर पहुँचकर अपने प्रण को पूरा करसके। पुलिस बल भी भारी मात्रा में मौजूद था,जाहिर सी बात हैं जौहर जैसी बात है अगर एक माचिस भी जल जाए तो क्या हो सकता हैं। महिला पुलिस बल भी वहाँ मौजूद था। चित्तौड़ में पूरा सन्नाटा था जो आवाज आरही थी माता पदमिनी के जयकारों की। महिला पुलिस द्वारा महिलाओं की चेकिंग की गयी कि कहीं किसी महिला के पास कोई माचिस तो नही जो वो लेकर चल रही है साथ में।

उम्मेद सिंह जी धोली समजाते हुए और साथ में उनके साथ बिराजित सरदार

दिन ढलने की ओर बढ़ रहा था और सभी का मन भी चिंतित था और सभी परेशान भी थे। सभी का ध्यान चित्तौड़ भूमि पर ही था। उम्मेद सिंह जी धोली साहब एक ऐसा नाम जिन्हें कौन नही जानता उनका आगमन भी इस कार्यक्रम में हुआ और धोली साहब ने क्षत्राणियों से निवेदन किया कि फिल्म में बदलाव करदिया गया और फिल्म की तारिक टल गयी उसका नाम बदल गया,ये हमारी जीत ही हुई हैं। आप सब दुर्गा का रूप हैं आपसे मेरी विनती हैं अपना फैसला वापस लेलो। परन्तु क्षत्राणियों को अपने प्रण की चिंता था। वहीं पर एक बुजुर्ग सरदार भी पधारे थे जिन्होंने विनती की क्षत्राणियों से कि वो ऐसा न करें और हमारी जीत हुई हैं। कुछ सरदार क्षत्राणियों के पैरो में गिर गये और विनती करने लगे कि आप ये फैसला मत लो। ऐसा लगरहा था मानो क्रोधित माता काली से भक्त विनती कररहे हो। जब उन बुजुर्ग सरदार के बारे में मैंने किसी से पूछा तो बताया कि ये विजय सिंह जी और सिरसू,मेड़ता से यहाँ पधारे हैं और इन्होने उपवास किया है कि क्षत्राणियों के जौहर से वो दुखी है और वो चाहते हैं क्षत्राणियां इस निर्णय को बदल ले। कई घंटे बीत गये परिस्थिति बहुत नाजुक बनगयी थी। किस क्षण क्या होजाये कुछ समज नही आरहा था। अंततः बहुत समजाने और क्षत्रियो द्वारा विनती करने पर क्षत्राणियों ने उस समय जौहर नही किया परन्तु सरकार को ज्ञापन सौंपा कि वो अपने जीवन को स्वयं ही नष्ट कर सकती है(इच्छा मृत्यु) ऐसा उनको अधिकार मिले। जो मीडिया, नेशनल चैनल पर राजपूतो को आतंकवादी और गलत बताने पर तुले थे, वही मीडिया के कुछ रिपोर्टर क्षत्राणियों का सामना नही कर पा रहे थे। वही क्षत्राणियों द्वारा उन चैनल का वहीं बहिष्कार किया गया जिन्होंने राजपूत समाज को गलत बोला, और उन चैनल को पीछे जाना पड़ा। इसके पश्च्यात क्षत्रियों ने अपना विरोध प्रदर्शन और नारे लगाना शुरू करदिया। यह दृश्य जो अबतक चल रहा था मन में परेशान कररहा था कि क्या अभी सब शांत होगया है?”

इच्छा मृत्यु का ज्ञापन सौंपते हुए क्षत्राणियां (नेतृत्व-मंजुश्री शक्तावत बम्बोरी)

जो पूरा व्रतांत आपने पढ़ा , हमारे एक सदस्य द्वारा दी गयी जानकारी पर हैं , वो उस समय उसी जौहर के साक्षी हैं। इस को लेकर हम एक विस्तृत पोस्ट फिर से करेंगे क्यूँकी कुछ शब्दों में जौहर और माता पदमिनी की बात पूरी करना असम्भव हैं। दरअसल ज्यादातर लोगो को नही पता हैं कि आखिर उस दिन हुआ क्या था? इसलिए ये जानना जरूरी हैं कि वो एक ऐतेहासिक दिन बना और उसकी घटना के मुख्य बिंदु हमने आपके सामने रखे। जब पुरे समाचार न मिले तो कई लोगो ने इस बात का काफी मजाक बनाया परन्तु वो सच से दूर थे। जौहर से पहले जो हुआ और क्या क्या परिस्थितियां रही , वो शायद बहुत कम लोग जानते हैं। आज 24 जनवरी है और इसी दिवस को याद दिलाने के लिए हमने आपके सामने यहाँ संक्षिप्त जानकारी रखी। हमें इस जानकारी को बताने वाले  J.S.Rathore  इस जौहर के साक्षी थे और वही मौजूद थे।

पूज्यश्री धोली साहब

हमारा उद्देश्य इतना था कि हमे न्यूज़ मीडिया से पूरी जानकारी नही मिलती और हम बात को अलग ही मोड़ देते हैं जो कि गलत हैं। जौहर वाले इस दिवस जो भी हुआ पर क्षत्राणियों ने जैसे अपना रौद्र रूप दिखाया वो भुलाया नही जा सकता। कैसे कोई उनके पैरो में झुककर उनसे ये विचार बदलने की प्रार्थना करता हैं ! सोचिए कैसा रहा होगा वो दृश्य?

आज की जानकारी में इतना ही। हमसे जुड़ें और आगे बने रहे जिससे आपको और जानकारियाँ मिलती रहेगी साथ ही जौहर से सम्बन्धित पूरी जानकारी भी आपके समक्ष जल्द लेकर आयेंगे।

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