राव जयमल राठौड़ पर जारी हुआ डाक टिकट
चित्तौड़ के ऐतिहासिक दुर्ग पर तीसरे शाके के सेनापति राव जयमल राठौड़ पर भारत सरकार द्वारा एक डाक टिकट उनके जन्म जयंती के अवसर पर 17 सितम्बर शुक्रवार को एक वर्चुअल समारोह में जारी किया गया जिसका आयोजन जौहर स्मृति संस्थान के सानिध्य में किया गया|

वर्चुअल समारोह में उपस्थित अतिथि :-
मारवाड़ नरेश श्री महाराजा गज सिंह जी जोधपूर , पंजाब के पूर्व राज्यपाल श्री वीपी सिंह जी बदनोर, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह जी शेखावत , संचार राज्य मंत्री देवू सिंह जी चौहान , सांसद सीपी जोशी जी , चित्तौड़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या , जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष तख़्त सिंह सोलंकी , के आतिथ्य में कलेक्टर परिसर में आयोजित हुए इस वर्चुअल समारोह में डाक टिकट जारी किया गया |कार्यक्रम का संचालन भूपाल नोबल्स की डॉ. अनीता कँवर राठौड़ द्वारा किया गया|

आयोजन की व्यवस्थाओं का डाक विभाग के अधिकारी एवं जौहर स्मृति संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा अवलोकन कर अंतिम रूप दिया गया |
समारोह में मारवाड़ महाराजा साहिब ने अपना सम्बोधन दिया और बताया कि राठौड़ वंश की मेड़तिया शाखा ने अपने अलग अलग युद्धों और त्याग से गौरव प्राप्त किया , श्री गजेन्द्र सिंह जी शेखावत ने इतिहास की जानकारी प्रस्तुत की तथा उन्होंने बताया कि जब अकबर ने चितौड़ को घेरा तब राव टोडरमल द्वारा उसने जयमल जी को बहुत प्रलोभन दिए परन्तु उन्होंने चेतावनी देकर उसे मना करदिया “म्हे गढ़ म्हारो मुं धणी असुर फेर किम्ह आण , कुंचियाँ गढ़ चित्रकोट री देदी मोहे दीवान , जयमल लिखे जवाब यूँ सुनजे अकबर शाह , आण फिरे गढ़ उपरा पढ़ियो धड़ पातशाह “ साथ ही श्री वीपी सिंह जी ने अपने पंजाब दौरे को लेकर बताया की जब वे पंजाब गये तब वहाँ भी उन्हें चित्तौड़ और जयमल जी के बारे में वहाँ के लोगो से काफी सुना , वहाँ के लोगो में भी जयमल जी को लेकर बहुत सम्मान देखा | संचार राज्य मंत्री देवू सिंह जी ने कहा कि हम आगे भी ऐसे वीरो के उपर डाक टिकट जारी करवाएंगे और इतिहास के इन वीरो को नमन करते हैं |
सभी ने खड़े होकर इस डाक टिकट को जारी किया :-

इस डाक टिकट के जारी होना सम्पूर्ण भारत के लिए गौरवपूर्ण और हर्ष की बात हैं , एक ऐसा अदम्य साहसी स्वतंत्रता प्रेमी वीर जिनकी जीवनी हमे बहुत प्रेरणा देती हैं|
जयमल जी ने अपनी सुजबूझ से चित्तौड़ के तीसरे घेराव होने पर चित्तौड़ में सेना का नेतृत्व किया और डटकर मुगलों से सामना किया,मुगलों ने सबात बनाकर दुर्ग दीवारों में बारूद लगाया , मुगल जिन दीवारों को क्षति पहुंचाते थे राजपूत उन्हें पुनः बना देते थे |
रात के अँधेरे में जयमल जी को छुपकर गोली मारी गयी जिससे वो घायल होगये , अगर जयमल जी को गोली न लगती तो अकबर का चित्तौड़ अभियान असफल होजाता | घायल होने के बाद भी अपने भतीजे कल्ला जी के कंधो पर बेठकर उन्होंने ऐसा भीषण युद्ध किया कि मुगल सेना पीछे हटने लगी और उन्हें मतवाले हाथी छोड़ने पड़े |
ऐसा वीर जिसकी वीरता से अकबर भी प्रभावित हुआ और उसने आगरा किले में राव जयमल जी और रावत पत्ता जी की हाथी पर विराजित मूर्तियाँ लगवाई |
जयमल जी की जीवनी हमे प्रेरणा देती हैं और आज ऐसे वीर के लिए भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया जिसमे जौहर स्मृति संस्थान की पहल और सांसद सीपी जोशी द्वारा इसके लिए अनुमोदन किया इसके लिए हम सभी आपको धन्यवाद देते हैं
आज इस वर्चुअल समारोह में उपस्थित सभी अतिथि तथा समारोह से जुड़े हुए सभी गणमान्य जन जिन्होंने इस शुभ अवसर पर अपना समय दिया आप सभी को शुभकामनाएं | इस पुरे समारोह का विडियो आपको राजपूताना वर्ल्ड के Youtube चैनल पर प्राप्त होगा | धन्यवाद
जय मेवाड़
जय एकलिंगनाथ
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