हल्दीघाटी युद्ध में लड़ने वाली क्षत्राणी
हल्दीघाटी (Haldighati) का युद्ध ऐतेहासिक युद्ध और विश्व प्रसिद्ध हैं,जिसके बारे में कोन नहीं जानता|
स्वाधीनता की आग को धधकाने वाले युद्ध के बारे में सबने पढ़ा है , परन्तु आज हम आपको एक ऐसी जानकारी देंगे जो शायद आपने न पढ़ी हो |

इस जानकारी के अनुसार हल्दीघाटी युद्ध में एक राजपूतानी ने लड़ाई लड़ी थी जो हम आपके सामने प्रस्तुत कररहे हैं|
मेवाड़ के कोशीथल ठिकाने की महरानी जिन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में लड़ाई लड़ी|
दरअसल हल्दीघाटी युद्ध के कुछ समय पहले मेवाड़ के कोशीथल ठिकाने के सामंत का देहान्त हुआ था |
हल्दीघाटी युद्ध के समय कोशीथल के स्वर्गीय सामंत के पुत्र छोटे थे , इसलिए युद्ध में भाग नही ले सकते थे|

अब इस परिस्थिति में कोशीथल की महारानी सा खुद आगे आईं और युद्ध की तैय्यारी करली और जिरहबख्तर पहनकर इस तरह युद्ध कौशल दिखाया की मेवाड़ के योद्धा भी उनको पहचान न पाएं|

युद्ध समाप्त हुआ और बाद में जब महाराणा प्रताप घायल अवस्था में उपचार करवाने कालोड़ा गाँव पहुँचे , तब उन्होंने वहाँ सैनिक वेश में स्त्री को देखा जो घायल सैनिको की मदद कररही थी|
जब ,महाराणा प्रताप को कोशीथल महारानी के युद्ध में भाग लेने वाली बात पता चली तो उन्होंने महारानी सा की वीरता की बहुत प्रशंसा की और महाराणा ने कोशीथल महारानी से कहा कि “आप क्या पारितोषिक प्राप्त करना चाहेंगी”

तत्पश्च्यात महारानी की इच्छानुसार महाराणा प्रताप ने उनको एक कलंगी प्रदान की जिसे ‘हुंकार की कलंगी’ के नाम से जाना जाता हैं|(हुंकार नामक एक पक्षी होता हैं,जिसके पंखो की कलंगी अपना महत्व रखती हैं) इस घटना के कई वर्षो बाद तक कोशीथल ठिकाने के ठाकुर इस कलंगी को अपनी पगड़ी पर लगाकर दरबार में आते रहे|
यह जानकारी हमे नारी शक्ति के बारे में अवगत कराती हैं,कैसे एक नारी ने अपनी बहादुरी से सबको विस्मित करदिया | क्षत्राणी का मान निभाने वाले महारानी सा का यश युगों युगों तक गाया जाएगा | आज जिसप्रकार राजपूतानी पर लोगो द्वारा कहा जाता है की महारानियाँ सिर्फ घर में बैठकर जोड़ तोड़ करती थी ये इतिहास उनके मुँह पर एक तमाचा है की एक महारानी सिर्फ घर और राज्य सम्भालती नही समय आने पर जगदम्बा का रूप धारण कर शत्रुओं पर काल बनकर टूटती हैं,हे कोशीथल की महारानी आपके चरणों में शत शत नमन
साथ ही कोशीथल महारानी की इससे मिलती जुलती घटना महाराणा राजसिंह से संबधित बताई जाती है |जानने की बात यह है की हो सकता हैं उस समय भी किसी क्षत्राणी ने युद्ध किया हो क्यूँकी राजपूतानी युद्ध कौशल में भी पारंगत होती थी|
बहुत से लोगो द्वारा इस इतिहास को लेकर प्रश्न किया जाता हैं, कि यह घटना सत्य नही परन्तु हुंकार की कलंगी जो कोशीथल ठिकाने के ठाकुरों द्वारा पगड़ी में लगाई गयी उसका क्या? साथ ही नारी शक्ति और वीरता की यह घटना प्रेरणादायक है |
कहने को तो लोगो ने महारानी पदमिनी के अस्तित्व पर भी सवाल उठाये थे परन्तु सच जुठलाया नही जा सकता |

FAQ’s
हल्दीघाटी युद्ध कब हुआ था ?
हल्दीघाटी युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था | इतिहास में कई जगह 21 जून भी बताया जाता हैं परन्तु 18 जून ज्यादा सटीक हैं |
कौन थी हल्दीघाटी युद्ध में लड़ने वाली राजपूत क्षत्राणी?
हल्दीघाटी युद्ध में लड़ने वाली क्षत्राणी , मेवाड़ के कोशिथल ठिकाने की महारानी थी |
हल्दीघाटी युद्ध किसने जीता था ?
इतिहास में सही अवलोकन करने के बाद पता चलता हैं , हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप ने जीता था | इसके पक्ष में इतिहासकारों के अलग अलग पक्षों को आपके सामने प्रस्तुत किया जाएगा |
#Battle_Of_Haldighati 1576 Between Rajputs & Mughals. Maharana Of Mewar’s Bravery Was Unfogettable…










2 Responses
ये कहानी सत्य है हुकुम हुंकार री कलंगी कोशिथल ठाकुरानी सा को युध्द में भाग लेने के फलस्वरूप मिली। परंतु यह हल्दी घाटी का युध्द नहीं था शायद। यह कोई अन्य युध्द था जो मराठा से हुआ था।
सन्दर्भ : माझल रात by राणी लक्ष्मी कुमारी चुन्डावत
बहुत बहुत आभार हुकुम आपका
अपडेट के लिए