
2. राणी चावडी सोभागदे धौलबगहराबोत्त की लड़की । जिसकै पुत्र दो हुए
1. सोनग
2 . भीम
और एक कन्या रूपबाइं हुई जो बालकपन में गुज़र गई
अम्बर रुधो तारहि , धर रुंधी राठौड़
छोहिल मोहिल चावड़ा , सोलंकी ने गौड़
एता कतधज मारिया, पाली बाँधा मोड़
वीरमदेव राव सलखा का छोटा पुत्र था मल्लीनाथ और जैत्तमल से छोटा था । वह बड़ा वीर, साहसी और निडर व्यक्ति था । दानी, उदार और परोपकारी भी था,
महान दानी स्वभाव का व्यक्ति था । अपने पास बहुत से राजपूत रखता था, जिससे इतनी-सी जागीर से उसका निर्वाह नहीं हो रहा था । इसलिए जब धन की आवश्यकता होती, वह डाके भी डालता था, परन्तु यह कहीं नहीं पाया गया कि उसने प्रजाजनों को कमजोर या गरीब को लूटा हो, वह मुस्लिम शाही काफिलों और उनकी पेशकसी आदि को लूटता था , राव विरम राठोड़ राज्य का एक विशिष्ट स्तम्भ और मल्लीनाथ का परम सहायक था ,मल्लीनाथ के साथ मुसलमानी आक्रमण के युद्ध में वीरमदेव शामिल था और बडी वीरता से लडा था, जगमाल के कार्यभार सम्भालने से पहले मल्लीनाथ के राज्य का कर्ताधर्ता प्राधन विरम ही रहा है ,जब जगमाल ने राज़ कार्य में हस्तक्षेप करना प्रारम्भ किया और विरम के भाई जैतमाल के धोखे से मार डाला तब वीरमदेब भिरड़गढ़ से पलायन कर अपनी जागीर में चला गया , उदा सांखला और जोइयो को शरण में रखकर उनका रक्षा करने के सिलसिले में जब जगमाल और मल्लीनाथ से इसकी अनबन हो गई , तो यह वहां से पहले तो वीरमपुर नाम का एक पृथक ग्राम बसाकर वहां रहने लगा और जब वहां से भी मल्लीनाथ व जगमाल ने निकल जाने का कहा , तो खेड का इलाका त्यागकर थली (रेगिस्तान) के इलाके (शेरगढ़ परगना) की और चला गया । वहाँ सेतरावा आदि 26 ग्रामों पर अधिकार करके अपनी बडी पत्नी सांखली और उससे उत्पन्न पुत्र देवराज, जयसिंहदेव और विजयसिह को छोड़कर स्वयं ने नागौर की और प्रयाण किया जोइयों को पहुंचाने के लिए जब पहली बार वीरमदेव सहवाण की ओर गया था, उसी समय सेतराव के इलाके पर अधिकार कर लिया था उसी समय मार्ग में कुण्डल (फलौदी परगना) के भाटी बैरीमाल की पुत्री से विवाह किया था । इस यात्रा से वापिस आकर फिर खेड़ का त्याग किया था और नागौर की और गया था क्योंकि वीरमदेव जब जोइयों को पहुंचाकर वापिस आया, जोइयों ने अपनी बछेरी समाध उसको दे दो थी । यह बछेरी जोइयों ने उनके खेड़ में रहते समय जगमाल व मल्लीनाथ ने मांगी परतु उन्हें नही दी जिससे वे ओर ज़्यादा नाराज़ हो गए,
उस समय मंडोर के मुसलमानों ने विरम पर आक्रमण किया लेकिन उन्हें हार मान कर भागना पड़ा ,उंसके बाद विरम ने मुसलमानों की पेशकश लूटकर जांगलू चला गया ,
कुछ समय बाद जोइयो से अनबन हो गई उंसके चलते उन्होंने विरम की गाये चुरा ली ओर कहा कि विरम स्वयं आ कर हमसे लड़ेगा इस बात पर विरम ने उनसे जा कर लड़ाई की गाये तो छुड़वाली लेकिन उसमें विरम वीरगति को गए
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