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Rajputana History

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June 5, 2020

Category:-

History Of Rajputana राजपूताना का इतिहास

राजपूताना का इतिहास गौरवशाली रहा है | राजपूत शब्द राजपुत्र शब्द का अपभ्रंश है जैसा कि आजकल एक भ्रान्ति फेली हुई है कि राजपूत शब्द 12 वीं शताब्दी का शब्द है किन्तु सच्चाई यह है की राजपूत शब्द प्राचीन समय के राजपुत्र शब्द का अपभ्रंश है और क्षत्रिय अर्थात राजपूत प्राचीन काल की वर्ण व्यवस्था का हिस्सा है| 
पूर्व  में राजपुत्रो को जन्म के पश्च्यात एक आयु में गुरुकुल जाना पड़ता था और गृह त्यागकर गुरुकुल में शस्त्र,शास्त्र,संस्कृति,धर्म और समाज की रक्षा के लिए शिक्षित किया जाता था| क्षत्रिय होने का अर्थ यह नही था की आप राजा हैं तो सुख भोगेंगे बल्कि इसके विपरीत क्षत्रिय को किसी भी जीवन सुख का लाभ लेने का अधिकार नही है क्षात्र धर्म के अनुसार एक क्षत्रिय को पहले अपने प्रजा और समाज के सुख ,सुरक्षा  पर ध्यान ऐना जरूरी है उसके पश्च्यात क्षत्रिय का जीवन है| 
हमे कई जगह यह पढने को मिलता है कि विवाह होते ही युद्ध में जाना या कही इतिहास की घटना एसी भी हुई है कि बारात घर पर लोटने से पहले ही क्षत्रिय को समाज  रक्षा के लिए  अपना क्षात्र धर्म निभाना पड़ता था और इस स्तिथि में वधु को भी कई बार युद्ध में भाग लेना होता था जो की इतिहास में कई बार हुआ है| 
क्षत्राणी :- यह कोई शब्द नही अपितु एक रूप है जो अपने अंदर अनंत आयाम समेटे हुए है क्षत्राणी एक माँ है एक संस्कृति का आधार है और अगर ये कहा जाये कि एक क्षत्रिय की शक्ति का केंद्र ही क्षत्राणी है तो यह कोई गलत नही होगा | क्षत्राणी माँ बनकर अपने पुत्रो को रण में लड़ने और रक्षा के लिए न्योछावर करदेती है और एक क्षत्राणी अपने पति को रण में युद्ध के लिए भेज देती है इस पर महासती हाड़ी राणी का वह समय याद आजाता है शायद आज भारतवर्ष का कोई ऐसा कोना नही बचा जहाँ पर हाड़ी राणी की वीर गाथा नही पहुंची होगी 
हमारा उद्देश्य है की आपको आपका सही इतिहास और जानकारी उपलब्ध करवाई जाए 
आज इन्टरनेट पर भांति भांति की जानकारियाँ उपलब्ध है उनमे से कई जानकारियों को विश्लेषण किया जाये तो वो समय काल में सही साबित नही होती इसलिए हमने सही इतिहास और राजग्रंथो पर आधारित इतिहास को आपके समक्ष लाने का प्रयास किया है ताकि आप अपने सही इतिहास से परिचित हो सके 
इसके माध्यम से हम हर वंश .हर कुल .रियासत , जागीरी, ठिकाना आदि सबकी जानकारी आप तक उपलब्ध करवायेगे
राज्य के शासको की सूचि और उनकी समस्त जानकारी तथा वंशावली और हर जानकारी जो आज हर राजपूत को जानना जरूरी है 
जोधपुर,जयपुर,उदयपुर,डूंगरपुर,बांसवाडा,मेड़ता, जैसलमेर,बीकानेर,नागौर,शेखावाटी,कोटा,बूंदी,
मालवा,सिंध आदि की जानकारी
(मेवाड़,मारवाड़,आमेर )
इसके साथ ही प्राचीन राज्य और वंशो से अबतक का पूरा इतिहास चाहे कैकई राज्य हो चाहे अयोध्या,हस्तिनापुर,इन्द्रप्रस्थ,अनंग,राष्ट्रकूट,चौल,
चालुक्य,चाहमान आदि की जानकारी आपको विधिवत उपलब्ध करवाने का प्रयास है
इसके लिए आपको रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी उसके पश्च्यात आप इसमें लॉग इन करके जानकारी ले सकते हैं 

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