SubhashChandra Bose & Rajputana– आज हम जानेंगे राजपूताना के उस ठिकानेदार के बारे में जानकारी जिन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी श्री सुभाषचन्द्र जी बोस(SubhashChandra Bose) को शरण दी थी। जी हाँ सुभाषचन्द्र बोस(SubhashChandra Bose) को किशनगढ़ के कर्मसोत ठिकानेदार ने दी थी शरण।आज भारत वर्ष स्वतंत्रता सेनानी पूज्य श्री वीर सुभाषचन्द्र बोस(SubhashChandra Bose) की जन्म जयंती पर बहुत प्रफ्फुलित है क्योंकि आजादी के बाद अब दिल्ली में नेताजी सुभाषचंद्र बोस(SubhashChandra Bose) की मूर्ति स्थापित हुई है।
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस(SubhashChandra Bose) हमेशा अंग्रेजो को खटकते थे तभी उन्हें कई अवसरों पर गुप्त रूप से रहकर संगठन को चलाना पड़ता था। ऐसे ही एक समय वे राजपूताना के किशनगढ़ राज्य के भामोलाव गांव में अज्ञातवास के समय रहे थे।

किशनगढ़ और भामोलाव दोनो ही मारवाड़ जोधपुर के राठोड़ों के वंशज है इस कारण हम सभी के लिए भी यह घटना महत्वपूर्ण है और गर्व करने वाली है।
जोधपुर के संस्थापक राव जोधा जी के सुयोग्य पुत्र “राव करमसी जी” हुए जिनके वंशज “करमसोत राठौड़” कहे जाते है।
इनका प्रमुख पाटवी ठिकाना “खिमसर” है । करमसी जी के एक वंशज धनराजजी ने अपने बाहुबल से डांवरा का ठिकाना स्थापित किया। ये बड़े वीर थे , इसी कारण इनके वंशज “धनराजोत करमसोत” की शाखा से प्रसिद्ध हुए।
डांवरा से एक परिवार महाराज किशनसिंह जी के साथ गया। जब किशनगढ़ राज्य की स्थापना हुई तब इनके वंशजो को अनेक ठिकाने मिले, जिनमें प्रमुख पाटवी ठिकान भामोलाव था। यह ठिकाना किशनगढ़ राज्य के प्रमुख नौ ठिकानों में से एक था ।

भामोलाव के ठाकुर गोकर्णसिंह जी स्वतंत्र प्रकृति के थे और सदैव भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे। वर्ष 1915 में इन्होंने ठिकाने की बागडोर संभाली थी।
ठाकुर गोकर्णसिंह जी ने किशनगढ़ के तीन शासकों के समय अपनी सेवाए दी थी तथा कई पदों पर रहे। इनकी शिक्षा महाराजा स्कूल से हुई तथा बाद में सलेमाबाद के निंबार्क संप्रदाय के महंत बालकृष्ण देवचार्य जी से दीक्षा भी प्राप्त की थी ।
ठाकुर साहब का कई क्रांतिकारी संगठनों के साथ संपर्क था तथा जब श्री सुभाषचंद्र बोस(SubhashChandra Bose) फरारी काट रहे थे तब वे ठाकुर साहब के पास आकर भामोलाव के गढ़ में कुछ दिनों तक रहे थे।
कुछ वर्ष पूर्व करमसोत राठौड़ के गोरवमयी इतिहास लेखन के समय जब मैं भामोलाव गया था तब मुझे वह स्थान भी दिखाया गया था जहाँ पर श्री सुभाषचंद्र बोस ठहरे थे ।











