सूर्यवंश कै समान ही चन्द्रवंश भी देवताओं और महान राजाओं की उत्पत्ति का एक प्रमुख वश है । चन्द्रवंश में ही कौरव, पांडव, श्रीकृष्ण आदि महान पौराणिक व्यक्तित्व उत्पन्न हुए हैँ । भगवान श्रीराम की तरह भगवान श्रीकृष्ण व उनकै अग्रज बलराम को भी भगवान बिष्णु का हौ अवतार माना जाता है । अत: इस क्रम को आगे स्पष्ट करने से पहले हम एक जार पुन: हिन्दू मान्यता कै अनुसार ईश्वर कॉ उत्पत्ति का संक्षिप्त सिंहावलोकन कॉगे, जिससे यह पता चले कि भगवान विष्णु ने कितने वार और किंन-किंन देवताओं कै रूप में अवतार लिये ।
प्रकृति कै तीन गुण हैँ : सत्व, रज व तम । इम्हें स्वीकार करकै इस संसार की स्थिति, उत्पत्ति और प्रलय कै लिये एक अद्वितीय परमात्मा, विष्णु ब्रह्मा और स्ख ये तीन नाम ग्रहण करते हैं । मनुष्यों का कल्याण सत्व गुण स्वीकार करने वाले श्रीहरि (बिष्णु) से ही होता है । ब्रह्मा का अवतरण विष्णु की नाभि से उत्पन्न होने वाले कमल से हूआ । जबकि रूद्र क्रो “अजन्मा” कहा गया है, जिसका अर्ध है कि उनके माता-पिता कै बरि में कोई ज्ञान नहीं है ।
अद्वितीय परमात्मा

—-चन्द्र वंश की शाखायें:-

1.जादौन, 2. भाटी, 3. तोमर, 4. चन्देल, 5. छोंकर, 6. होंड, 7. पुण्डीर, 8. कटैरिया, 9. दहिया,